धुंध, जहाज़, और डीएनए की बहुत लंबी रात
ठंडी हवा में मैं बंदरगाह की बालकनी पर खड़ा था। धुंध में जहाज़ पल भर दिखते, फिर गायब। मैं हर जहाज़ पर नज़र नहीं रख सकता था, तो छोटी डायरी में बस दो चार बातें लिख लेता, ताकि अगली झलक पर दिशा न भूले।
डीएनए भी ऐसी ही धुंधली समुद्री लाइन जैसा है, बस बहुत लंबा। यह चार अक्षरों की लड़ी है, ए, सी, जी, टी। कई पुराने तरीके ऐसे हैं जैसे चौकीदार हर नए जहाज़ को हर पुराने जहाज़ से मिलाने दौड़ता रहे, लंबाई बढ़ते ही समय और याददाश्त खिंचने लगती है।
काड्यूसियस और हॉक ने वही डायरी वाला अंदाज़ अपनाया। हर नया अक्षर आते ही वे अपने अंदर एक तय आकार का छोटा सार अपडेट करते रहते हैं, जैसे डायरी में नई पंक्ति जुड़ती है पर डायरी का आकार नहीं बदलता। जहाज़ों की धारा, डीएनए की धारा है, और डायरी, अंदर की छोटी याद।
जब इन्हें आम लंबाई वाले कामों पर परखा गया, डायरी वाला अंदाज़ कमजोर नहीं निकला। काड्यूसियस कई कामों में पुराने मजबूत आधार जितना, कई बार उससे बेहतर भी रहा। लेकिन हॉक की कुछ रिपोर्टें अलग थीं, खासकर कुछ खास किस्म के बदलाव वाले कामों में वह काड्यूसियस से साफ पीछे रहा।
फिर दूरी बढ़ाई गई, जैसे धुंध में रात लंबी होती जाए। बिना खास नई सेटिंग के काड्यूसियस को बहुत ज्यादा लंबे हिस्सों तक खींचा गया और नतीजे बस थोड़ा बदले। हॉक ने भी अपने बदलाव वाले अंकों को लंबाई बढ़ने पर काफी हद तक स्थिर रखा, जबकि हर-चीज-से-हर-चीज मिलाने वाला तरीका दूर जाते ही लड़खड़ाने लगा।
और जब लाइन इतनी लंबी हो गई कि एक बार में देख पाना मुश्किल था, तरकीब सीधी थी। डीएनए को टुकड़ों में पढ़ो, एक टुकड़े के अंत की डायरी अगली पारी को थमा दो, ताकि कहानी रीसेट न हो। फिर भी एक बात रह गई, दूर तक देख लेना काफी नहीं, उस दूर की समझ बनाना अगला कदम है।