रात के शो की एक सूची, और आसमान के ग्रहों की दूसरी
भीड़ के शोर के बीच मैं पर्दे के पास खड़ा था, मोटी नोटबुक पलटते हुए। हर कलाकार के लिए अलग-अलग दिनों की पोशाक वाली पर्चियां थीं, कुछ एक-दूसरे से टकराती हुई। मुझे आज रात की एक साफ सूची चाहिए थी, पर पुराने नोट फेंक भी नहीं सकता था।
पिछले साल वही नोटबुक ठीक चलती थी, पर अब नए दल रोज़ आ रहे थे। वही नाम बार-बार, पन्नों में उलझी कड़ियां, और सही क्रम ढूंढने में देर। तब मैंने ढांचा बदला: एक जगह असली सूची, और उसके पीछे हर पुराने नोट का अलग रिकॉर्ड, ताकि भीड़ बढ़े तो सिस्टम न टूटे।
फिर बदलावों के लिए नियम बनाए। जो भूमिका बस अफ़वाह निकली, उसे मुख्य सूची से हटाकर भी उसका निशान रखा, ताकि बाद में सवाल हो तो जवाब मिले। जो भूमिका पर झगड़ा था, उस पर साफ निशान लगाया, ताकि कोई उसे पक्का सच मानकर चौंके नहीं।
ओपनिंग नाइट के कार्यक्रम में एक और मुसीबत थी: कई जगह कद, भाषा, या पोशाक का माप खाली। मैंने हर कलाकार के लिए एक “सबसे अच्छा” लाइन बनाई: जहाँ आज वाला नोट खाली था, वहाँ किसी और दिन का सबसे ठीक नोट लिया, या जो पता था उससे अंदाज़ा लगाया। तुलना आसान हो गई, और पीछे सारे असली नोट सुरक्षित रहे।
हॉल के पार ध्वनि वाला दल परेशान था। अलग जगहों से रिकॉर्डिंग आई थीं, सबको एक-दूसरे पर रखकर फर्क सुनना था। हमने एक साझा सुनने की मेज़ बना दी, जहाँ ट्रैक साथ रखकर जल्दी तुलना हो जाए। उसी तरह अलग-अलग तरह की खोजों और “किस तारे के पास कौन” वाली जानकारी के लिए भी साफ रास्ते बनाए, ताकि पन्ने-पन्ने भटकना न पड़े।
शो खत्म होते ही बाहर की टीमों के क्लिपबोर्ड जमा होने लगे। हमने एक सार्वजनिक बोर्ड बनाया, जहाँ लोग फाइलें डालें, काम बाँटें, और दिखे कि कल किसे क्या देखना है। तब मुझे फर्क साफ लगा: यह बस नामों की ट्रॉफी नहीं, चलती हुई काम की डायरी है, ताकि आगे भी नई एंट्री आते रहें और व्यवस्था संभली रहे।