दूरबीन की सही ट्यूनिंग से कैंसर कोशिकाओं की पहचान
एक तजुर्बेकार पक्षी-निरीक्षक पहाड़ी पर बैठी है। हज़ारों मुनियों के झुंड में दो लगभग एक जैसी चिड़ियों को अलग पहचानना है। दूर का आकार दिखाने वाली दूरबीन काफ़ी नहीं, उसे बारीक पंखों के निशान भी साफ़ चाहिए। यही मुश्किल है जिगर के कैंसर की सूक्ष्मदर्शी स्लाइड पढ़ने में, कोशिकाएँ देखने में लगभग एक जैसी लगती हैं।
बरसों से डॉक्टर ये काम आँखों से करते आए हैं, स्लाइड दर स्लाइड। दो माहिर एक ही स्लाइड पर कभी-कभी अलग राय देते हैं। कंप्यूटर से उम्मीद जगी, लेकिन आम तरीक़ा था कि रोज़मर्रा की तस्वीरों पर सिखाई गई मशीन के बस आख़िरी हिस्से को बदल दो। ये वैसा ही है जैसे दूरबीन में सिर्फ़ आईपीस का ढक्कन बदलो, अंदर का लेंस वही रहे।
नई बात ये है कि सिर्फ़ ढक्कन नहीं, दूरबीन के अगले लेंस भी खोलकर फिर से फ़ोकस किए गए, वो हिस्सा जो बारीक रंग और बनावट पकड़ता है। पीछे के लेंस जो बड़ी आकृतियाँ दिखाते हैं, वो जस के तस रहे। साथ में आख़िर का एक-चरणी लेबल हटाकर कई चरणों वाली छँटाई लगाई गई, जैसे दूरबीन में कई फ़िल्टर पहिए लगा दो जो धीरे-धीरे सही पहचान तक पहुँचाएँ।
आठ अलग-अलग मशीनी ढाँचों और तीन अलग स्लाइड संग्रहों पर इसे आज़माया गया। हर बार अपग्रेड किया हुआ तरीक़ा पुराने से बेहतर निकला। सबसे अच्छे नतीजे में जिगर कैंसर की सार्वजनिक स्लाइडों पर एक भी ग़लती नहीं हुई। भारत के एक अस्पताल की स्लाइडों पर सटीकता लगभग सत्तानवे फ़ीसदी तक पहुँची।
सबसे चौंकाने वाली बात, पहले की कोशिशों में दस गुना ज़्यादा तस्वीरों से सिखाने पर भी इतनी सटीकता नहीं मिली थी। एक पुरानी कोशिश में क़रीब उनतालीस हज़ार नमूनों से नब्बे फ़ीसदी तक पहुँचे थे। यहाँ साढ़े तीन हज़ार नमूनों से सौ फ़ीसदी मिला। कम आँकड़े, बेहतर जवाब।
कोई एक ढाँचा हर जगह सबसे अच्छा नहीं रहा। जिगर की स्लाइडों का विजेता अलग था, अस्पताल की स्लाइडों का अलग, आँत के कैंसर का अलग। लेकिन अगले लेंस को फिर से फ़ोकस करने और छँटाई को गहरा करने की रणनीति ने हर ढाँचे को हर संग्रह पर फ़ायदा दिया। यही एकरूपता असली ताक़त है।
ये मशीनें भारी हैं, किसी छोटे क्लिनिक के साधारण कंप्यूटर पर अभी नहीं चलेंगी। उन्हें हल्का बनाना अगली चुनौती है। लेकिन जहाँ दो डॉक्टर एक ही स्लाइड पर असहमत हो सकते हैं, वहाँ एक ऐसा औज़ार जो बार-बार लगभग एक जैसा जवाब दे, बड़ी बात है। पक्षी-निरीक्षक ने अपनी आँखें नहीं बदलीं, बस दूरबीन के सही लेंस खोलकर ट्यून किए और बारीक निशान साफ़ दिखने लगे।