कंचे का टेस्ट और पत्थर की मशीन
एक पत्थर तराशने वाली कार्यशाला में नई स्वचालित मशीन की जाँच हो रही है। यहाँ काम की असली परख 'कंचे' से होती है। अगर बनाया गया फर्श सच में समतल है, तो उस पर रखा कंचा अपनी जगह पर स्थिर रहना चाहिए। अगर सतह में जरा सा भी झुकाव हुआ, तो कंचा लुढ़क जाएगा।
शुरुआत में मशीन को सिर्फ भारी और चौकोर ग्रेनाइट के पत्थरों से फर्श बनाना सिखाया गया। यह वैसा ही था जैसे केवल एक ही समूह (जैसे सिर्फ पुरुषों) की जानकारी का इस्तेमाल करना। फर्श दिखने में तो कतारबद्ध लगा, लेकिन उसमें एक तरफा झुकाव था। जैसे ही कंचा रखा गया, वह तुरंत कोने में लुढ़क गया।
इंजीनियरों ने तरीका बदला। उन्होंने मशीन को चौकोर पत्थरों के साथ नदी के गोल पत्थर भी दिए। मशीन ने सीखा कि अलग-अलग आकार कैसे एक-दूसरे में फिट होते हैं। गोल पत्थरों ने उन खाली जगहों को भर दिया जो चौकोर पत्थर छोड़ रहे थे, ठीक वैसे ही जैसे विविध लोगों का डेटा कमियों को पूरा करता है।
अब जो फर्श तैयार हुआ, वह पहले से कहीं ज्यादा घना और संतुलित था। जब इस मिले-जुले पत्थरों वाले फर्श पर कंचा रखा गया, तो वह बिल्कुल बीच में स्थिर रहा। अलग-अलग तरह की सामग्री ने वह संतुलन बना दिया जो किसी एक तरह के पत्थर से मुमकिन नहीं था।
अंत में एक चौंकाने वाली बात सामने आई। सबसे माहिर इंसानी कारीगर के बनाए फर्श पर भी कंचा थोड़ा डगमगाया, लेकिन मशीन के फर्श पर वह एकदम स्थिर था। इससे पता चला कि अगर मशीन को सही और मिली-जुली जानकारी दी जाए, तो वह निष्पक्षता में अपने उस्ताद से भी आगे निकल सकती है।